Couplets Poetry (page 93)
कोई ऐसे वक़्त में हम से बिछड़ा है
शमीम अब्बास
कभी मय-कदा कभी बुत-कदा कभी काबा तो कभी ख़ानक़ाह
शमीम अब्बास
ज़रा चश्म-ए-करम से देख लो तुम
शाकिर कलकत्तवी
ये माजरा-ए-मोहब्बत समझ में आ न सका
शाकिर कलकत्तवी
रोने के बदले अपनी तबाही पे हँस दिया
शाकिर कलकत्तवी
क़सम ही नहीं है फ़क़त इस का शेवा
शाकिर कलकत्तवी
ज़िंदगी ऐसे भी हालात बना देती है
शकील जमाली
उम्र का एक और साल गया
शकील जमाली
तुम्हारे बा'द बड़ा फ़र्क़ आ गया हम में
शकील जमाली
शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल-चेहरा
शकील जमाली
सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
शकील जमाली
रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे
शकील जमाली
मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज
शकील जमाली
मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज
शकील जमाली
मसअला ख़त्म हुआ चाहता है
शकील जमाली
मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग
शकील जमाली
लोग कहते हैं कि इस खेल में सर जाते हैं
शकील जमाली
कुछ लोग हैं जो झेल रहे हैं मुसीबतें
शकील जमाली
कोई स्कूल की घंटी बजा दे
शकील जमाली
किन ज़मीनों पे उतारोगे इमदाद का क़हर
शकील जमाली
झूट में शक की कम गुंजाइश हो सकती है
शकील जमाली
हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद
शकील जमाली
हर कोने से तेरी ख़ुशबू आएगी
शकील जमाली
ग़म के पीछे मारे मारे फिरना क्या
शकील जमाली
इक बीमार वसिय्यत करने वाला है
शकील जमाली
इक बीमार वसीयत करने वाला है
शकील जमाली
अपने ख़ून से इतनी तो उम्मीदें हैं
शकील जमाली
अगर हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था
शकील जमाली
अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता
शकील जमाली
जब उठे तूफ़ाँ तो कोई चीज़ ज़द में हो 'शकील'
शकील ग्वालिआरी