Couplets Poetry (page 94)

ज़िंदगी आ तुझे क़ातिल के हवाले कर दूँ

शकील बदायुनी

ज़रा नक़ाब-ए-हसीं रुख़ से तुम उलट देना

शकील बदायुनी

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है

शकील बदायुनी

ये किस ख़ता पे रूठ गई चश्म-ए-इल्तिफ़ात

शकील बदायुनी

ये अदा-ए-बे-नियाज़ी तुझे बेवफ़ा मुबारक

शकील बदायुनी

वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं

शकील बदायुनी

वो हम से दूर होते जा रहे हैं

शकील बदायुनी

वो हवा दे रहे हैं दामन की

शकील बदायुनी

वो अगर बुरा न मानें तो जहान-ए-रंग-ओ-बू में

शकील बदायुनी

वही कारवाँ वही रास्ते वही ज़िंदगी वही मरहले

शकील बदायुनी

उठा जो मीना-ब-दस्त साक़ी रही न कुछ ताब-ए-ज़ब्त बाक़ी

शकील बदायुनी

उन्हें अपने दिल की ख़बरें मिरे दिल से मिल रही हैं

शकील बदायुनी

उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की याद

शकील बदायुनी

उजाले गर्मी-ए-रफ़्तार का ही साथ देते हैं

शकील बदायुनी

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो

शकील बदायुनी

तुझ से बरहम हूँ कभी ख़ुद से ख़फ़ा

शकील बदायुनी

तर्क-ए-मय ही समझ इसे नासेह

शकील बदायुनी

सुना है ज़िंदगी वीरानियों ने लूट ली मिल कर

शकील बदायुनी

सितम-नवाज़ी-ए-पैहम है इश्क़ की फ़ितरत

शकील बदायुनी

सिदक़-ओ-सफ़ा-ए-क़ल्ब से महरूम है हयात

शकील बदायुनी

शाम-ए-ग़म करवट बदलता ही नहीं

शकील बदायुनी

'शकील' इस दर्जा मायूसी शुरू-ए-इश्क़ में कैसी

शकील बदायुनी

शग़ुफ़्तगी-ए-दिल-ए-कारवाँ को क्या समझे

शकील बदायुनी

सब करिश्मात-ए-तसव्वुर हैं 'शकील'

शकील बदायुनी

रिंद-ए-ख़राब-नोश की बे-अदबी तो देखिए

शकील बदायुनी

रहमतों से निबाह में गुज़री

शकील बदायुनी

पी शौक़ से वाइज़ अरे क्या बात है डर की

शकील बदायुनी

फिर वही जोहद-ए-मुसलसल फिर वही फ़िक्र-ए-मआश

शकील बदायुनी

नज़र-नवाज़ नज़ारों में जी नहीं लगता

शकील बदायुनी

नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है

शकील बदायुनी