Couplets Poetry (page 96)

जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई

शकील बदायुनी

हम से मय-कश जो तौबा कर बैठें

शकील बदायुनी

हर दिल में छुपा है तीर कोई हर पाँव में है ज़ंजीर कोई

शकील बदायुनी

हर चीज़ नहीं है मरकज़ पर इक ज़र्रा इधर इक ज़र्रा उधर

शकील बदायुनी

हाए वो ज़िंदगी की इक साअत

शकील बदायुनी

ग़म-ए-उम्र-ए-मुख़्तसर से अभी बे-ख़बर हैं कलियाँ

शकील बदायुनी

ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है

शकील बदायुनी

ग़म की दुनिया रहे आबाद 'शकील'

शकील बदायुनी

दुश्मनों को सितम का ख़ौफ़ नहीं

शकील बदायुनी

दुनिया की रिवायात से बेगाना नहीं हूँ

शकील बदायुनी

दिल की तरफ़ 'शकील' तवज्जोह ज़रूर हो

शकील बदायुनी

दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ

शकील बदायुनी

छुपे हैं लाख हक़ के मरहले गुम-नाम होंटों पर

शकील बदायुनी

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल

शकील बदायुनी

बुज़-दिली होगी चराग़ों को दिखाना आँखें

शकील बदायुनी

भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील'

शकील बदायुनी

बे-तअल्लुक़ तिरे आगे से गुज़र जाता है

शकील बदायुनी

बे-तअल्लुक़ तिरे आगे से गुज़र जाता है

शकील बदायुनी

बे-पिए शैख़ फ़रिश्ता था मगर

शकील बदायुनी

बदलती जा रही है दिल की दुनिया

शकील बदायुनी

बात जब है ग़म के मारों को जिला दे ऐ 'शकील'

शकील बदायुनी

अपनों ने नज़र फेरी तो दिल तू ने दिया साथ

शकील बदायुनी

ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया

शकील बदायुनी

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे

शकील बदायुनी

आप जो कुछ कहें हमें मंज़ूर

शकील बदायुनी

ज़मीन ले के वो आए तो घर बनाया जाए

शकील आज़मी

तुम्हारे दर्द से ले कर हमारे आँसू तक

शकील आज़मी

फिर यूँ हुआ थकन का नशा और बढ़ गया

शकील आज़मी

मुझ को बिखराया गया और समेटा भी गया

शकील आज़मी

मेरे होंटों पे ख़ामुशी है बहुत

शकील आज़मी