Couplets Poetry (page 95)
न पैमाने खनकते हैं न दौर-ए-जाम चलता है
शकील बदायुनी
मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना
शकील बदायुनी
मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन
शकील बदायुनी
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे
शकील बदायुनी
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारागर
शकील बदायुनी
मुझे आ गया यक़ीं सा कि यही है मेरी मंज़िल
शकील बदायुनी
मोहब्बत ही में मिलते हैं शिकायत के मज़े पैहम
शकील बदायुनी
मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं
शकील बदायुनी
मिरी तेज़-गामियों से नहीं बर्क़ को भी निस्बत
शकील बदायुनी
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
शकील बदायुनी
मेरा अज़्म इतना बुलंद है कि पराए शोलों का डर नहीं
शकील बदायुनी
मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद-दुआ दी
शकील बदायुनी
मैं बताऊँ फ़र्क़ नासेह जो है मुझ में और तुझ में
शकील बदायुनी
लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएँ घुटी घुटी
शकील बदायुनी
लम्हात-ए-याद-ए-यार को सर्फ़-ए-दुआ न कर
शकील बदायुनी
क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें
शकील बदायुनी
क्या असर था जज़्बा-ए-ख़ामोश में
शकील बदायुनी
कोई दिलकश नज़ारा हो कोई दिलचस्प मंज़र हो
शकील बदायुनी
कोई ऐ 'शकील' पूछे ये जुनूँ नहीं तो क्या है
शकील बदायुनी
कितनी दिल-कश हैं तिरी तस्वीर की रानाइयाँ
शकील बदायुनी
किस से जा कर माँगिये दर्द-ए-मोहब्बत की दवा
शकील बदायुनी
ख़ुश हूँ कि मिरा हुस्न-ए-तलब काम तो आया
शकील बदायुनी
खुल गया उन की आरज़ू में ये राज़
शकील बदायुनी
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
शकील बदायुनी
कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
शकील बदायुनी
कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है
शकील बदायुनी
काफ़ी है मिरे दिल की तसल्ली को यही बात
शकील बदायुनी
कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अतन तग़ाफ़ुल
शकील बदायुनी
जीने वाले क़ज़ा से डरते हैं
शकील बदायुनी
जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का 'शकील'
शकील बदायुनी