Couplets Poetry (page 119)
तिश्नगी ख़ाक बुझे अश्क की तुग़्यानी से
शाह नसीर
तेरे ख़याल-ए-नाफ़ से चक्कर में किया है दिल
शाह नसीर
तिरे ही नाम की सिमरण है मुझ को और तस्बीह
शाह नसीर
तार-ए-नफ़स उलझ गया मेरे गुलू में आ के जब
शाह नसीर
तार-ए-मिज़्गाँ पे रवाँ यूँ है मिरा तिफ़्ल-ए-सरिश्क
शाह नसीर
सुपर रखता हूँ मैं भी आफ़्ताबी साग़र-ए-मय की
शाह नसीर
शौक़-ए-कुश्तन है उसे ज़ौक़-ए-शहादत है मुझे
शाह नसीर
शराब लाओ कबाब लाओ हमारे दिल को न अब घटाओ
शाह नसीर
शैख़-साहिब की नमाज़-ए-सहरी को है सलाम
शाह नसीर
सय्याद के जिगर में करे था सिनाँ का काम
शाह नसीर
सौ बार बोसा-ए-लब-ए-शीरीं वो दे तो लूँ
शाह नसीर
सरज़मीन-ए-ज़ुल्फ़ में क्या दिल ठिकाने लग गया
शाह नसीर
सरज़मीं ज़ुल्फ़ की जागीर में थी इस दिल की
शाह नसीर
सर-ए-मिज़्गाँ ये नाले अब भी आँसू को तरसते हैं
शाह नसीर
सर-बुलंदी को यहाँ दिल ने न चाहा मुनइम
शाह नसीर
सैर की हम ने जो कल महफ़िल-ए-ख़ामोशाँ की
शाह नसीर
सब पे रौशन है कि राह-ए-इश्क़ में मानिंद-ए-शम्अ
शाह नसीर
रुवाक़-ए-चशम में मत रह कि है मकान-ए-नुज़ूल
शाह नसीर
रेख़्ता के क़स्र की बुनियाद उठाई ऐ 'नसीर'
शाह नसीर
रख क़दम होश्यार हो कर इश्क़ की मंज़िल में आह
शाह नसीर
पूछने वालों को क्या कहिए कि धोके में नहीं
शाह नसीर
पिस्ताँ को तेरे देख के मिट जाए फिर हुबाब
शाह नसीर
'नसीर' उस ज़ुल्फ़ की ये कज-अदाई कोई जाती है
शाह नसीर
'नसीर' अब हम को क्या है क़िस्सा-ए-कौनैन से मतलब
शाह नसीर
नहीं है फ़ुर्सत-ए-इक-दम प आह उस को नज़र
शाह नसीर
न क्यूँ कि अश्क-ए-मुसलसल हो रहनुमा दिल का
शाह नसीर
न हाथ रख मिरे सीने पे दिल नहीं इस में
शाह नसीर
मुल्ला की दौड़ जैसे है मस्जिद तलक 'नसीर'
शाह नसीर
मेरे नाले के न क्यूँ हो चर्ख़-ए-अख़्ज़र ज़ेर-ए-पा
शाह नसीर
मता-ए-दिल बहुत अर्ज़ां है क्यूँ नहीं लेते
शाह नसीर