Couplets Poetry (page 123)

परवानों का तो हश्र जो होना था हो चुका

शाद अज़ीमाबादी

निगाह-ए-नाज़ से साक़ी का देखना मुझ को

शाद अज़ीमाबादी

नज़र की बर्छियाँ जो सह सके सीना उसी का है

शाद अज़ीमाबादी

मिलेगा ग़ैर भी उन के गले ब-शौक़ ऐ दिल

शाद अज़ीमाबादी

मैं हैरत ओ हसरत का मारा ख़ामोश खड़ा हूँ साहिल पर

शाद अज़ीमाबादी

लहद में क्यूँ न जाऊँ मुँह छुपाए

शाद अज़ीमाबादी

कुछ ऐसा कर कि ख़ुल्द आबाद तक ऐ 'शाद' जा पहुँचें

शाद अज़ीमाबादी

ख़मोशी से मुसीबत और भी संगीन होती है

शाद अज़ीमाबादी

कौन सी बात नई ऐ दिल-ए-नाकाम हुई

शाद अज़ीमाबादी

कहते हैं अहल-ए-होश जब अफ़्साना आप का

शाद अज़ीमाबादी

कहाँ से लाऊँ सब्र-ए-हज़रत-ए-अय्यूब ऐ साक़ी

शाद अज़ीमाबादी

जीते जी हम तो ग़म-ए-फ़र्दा की धुन में मर गए

शाद अज़ीमाबादी

जैसे मिरी निगाह ने देखा न हो कभी

शाद अज़ीमाबादी

जब किसी ने हाल पूछा रो दिया

शाद अज़ीमाबादी

इज़हार-ए-मुद्दआ का इरादा था आज कुछ

शाद अज़ीमाबादी

हूँ इस कूचे के हर ज़र्रे से आगाह

शाद अज़ीमाबादी

हज़ार शुक्र मैं तेरे सिवा किसी का नहीं

शाद अज़ीमाबादी

दिल-ए-मुज़्तर से पूछ ऐ रौनक़-ए-बज़्म

शाद अज़ीमाबादी

ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम

शाद अज़ीमाबादी

चमन में जा के हम ने ग़ौर से औराक़-ए-गुल देखे

शाद अज़ीमाबादी

भरे हों आँख में आँसू ख़मीदा गर्दन हो

शाद अज़ीमाबादी

ऐ शौक़ पता कुछ तू ही बता अब तक ये करिश्मा कुछ न खुला

शाद अज़ीमाबादी

अब भी इक उम्र पे जीने का न अंदाज़ आया

शाद अज़ीमाबादी

चलते रहे तो कौन सा अपना कमाल था

शबनम शकील

अब मुझ को रुख़्सत होना है अब मेरा हार-सिंघार करो

शबनम शकील

तेरी ताबिश से रौशन हैं गुल भी और वीराने भी

शबनम रूमानी

दिल की धड़कन भी बड़ी चीज़ है तन्हाई में

शबनम नक़वी

ये तो सोचा ही नहीं उस को जुदा करते हुए

शबाना यूसुफ़

मुझ को भी कर देगा रुस्वा वो ज़माने भर में

शबाना यूसुफ़

मेरे आने की ख़बर सुन के वो दौड़ा आता

शबाना यूसुफ़