Couplets Poetry (page 43)

तेरे लब के हुक़ूक़ हैं मुझ पर

वली मोहम्मद वली

रश्क सूँ तुझ लबाँ की सुर्ख़ी पर

वली मोहम्मद वली

राह-ए-मज़मून-ए-ताज़ा बंद नहीं

वली मोहम्मद वली

फिर मेरी ख़बर लेने वो सय्याद न आया

वली मोहम्मद वली

न हो क्यूँ शोर दिल की बाँसुली में

वली मोहम्मद वली

मुफ़लिसी सब बहार खोती है

वली मोहम्मद वली

किशन की गोपियाँ की नईं है ये नस्ल

वली मोहम्मद वली

ख़ूब-रू ख़ूब काम करते हैं

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

जामा-ज़ेबों को क्यूँ तजूँ कि मुझे

वली मोहम्मद वली

हर ज़र्रा उस की चश्म में लबरेज़-ए-नूर है

वली मोहम्मद वली

गुल हुए ग़र्क़ आब-ए-शबनम में

वली मोहम्मद वली

दिल-ए-उश्शाक़ क्यूँ न हो रौशन

वली मोहम्मद वली

देखना हर सुब्ह तुझ रुख़्सार का

वली मोहम्मद वली

छुपा हूँ मैं सदा-ए-बाँसुली में

वली मोहम्मद वली

चाहता है इस जहाँ में गर बहिश्त

वली मोहम्मद वली

ऐ नूर-ए-जान-ओ-दीदा तिरे इंतिज़ार में

वली मोहम्मद वली

आरज़ू-ए-चश्मा-ए-कौसर नईं

वली मोहम्मद वली

आज तुझ याद ने ऐ दिलबर-ए-शीरीं-हरकात

वली मोहम्मद वली

आज तेरी भवाँ ने मस्जिद में

वली मोहम्मद वली

ज़माना और अभी ठोकरें लगाए हमें

वाली आसी

वहाँ हमारा कोई मुंतज़िर नहीं फिर भी

वाली आसी

उन्हें भी जीने के कुछ तजरबे हुए होंगे

वाली आसी

सब बिछड़े साथी मिल जाएँ मुरझाएँ चेहरे खिल जाएँ

वाली आसी

मुसल्ला रखते हैं सहबा-ओ-जाम रखते हैं

वाली आसी

मौज-ए-हवा आब-ए-रवाँ और ये ज़मीन ओ आसमाँ

वाली आसी

मैं जिस का जवाब न दे पाऊँ

वाली आसी

कभी भूले से भी अब याद भी आती नहीं जिन की

वाली आसी

इश्क़ की राह में यूँ हद से गुज़र मत जाना

वाली आसी

इश्क़ बिन जीने के आदाब नहीं आते हैं

वाली आसी