Couplets Poetry (page 187)
हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
रईस फ़रोग़
फ़स्ल तुम्हारी अच्छी होगी जाओ हमारे कहने से
रईस फ़रोग़
इक यही दुनिया बदलती है 'फ़रोग़'
रईस फ़रोग़
अपने हालात से मैं सुल्ह तो कर लूँ लेकिन
रईस फ़रोग़
आएगा मेरे बाद 'फ़रोग़' इन का ज़माना
रईस फ़रोग़
टहनी पे ख़मोश इक परिंदा
रईस अमरोहवी
सिर्फ़ तारीख़ की रफ़्तार बदल जाएगी
रईस अमरोहवी
सदियों तक एहतिमाम-ए-शब-ए-हिज्र में रहे
रईस अमरोहवी
पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े
रईस अमरोहवी
पहले भी ख़राब थी ये दुनिया
रईस अमरोहवी
किस ने देखे हैं तिरी रूह के रिसते हुए ज़ख़्म
रईस अमरोहवी
ख़ामोश ज़िंदगी जो बसर कर रहे हैं हम
रईस अमरोहवी
हम अपनी ज़िंदगी तो बसर कर चुके 'रईस'
रईस अमरोहवी
हम अपने हाल-ए-परेशाँ पे बारहा रोए
रईस अमरोहवी
दिल से मत सरसरी गुज़र कि 'रईस'
रईस अमरोहवी
दिल कई रोज़ से धड़कता है
रईस अमरोहवी
चंद बेनाम-ओ-निशाँ क़ब्रों का
रईस अमरोहवी
अपने को तलाश कर रहा हूँ
रईस अमरोहवी
अभी से शिकवा-ए-पस्त-ओ-बुलंद हम-सफ़रो
रईस अमरोहवी
अब दिल की ये शक्ल हो गई है
रईस अमरोहवी
आदमी की तलाश में है ख़ुदा
रईस अमरोहवी
ईद का चाँद जो देखा तो तमन्ना लिपटी
रहमत क़रनी
ज़िंदगी ढूँढ ले तू भी किसी दीवाने को
राही मासूम रज़ा
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
राही मासूम रज़ा
हाँ उन्हीं लोगों से दुनिया में शिकायत है हमें
राही मासूम रज़ा
दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई
राही मासूम रज़ा
ये कैसा गुल खिलाया है शजर ने
राही फ़िदाई
शराफ़तों के रंग में शरारतें ख़लत-मलत
राही फ़िदाई
सब्ज़ा-ज़ारों की शराफ़त से न खेलो क़तअन
राही फ़िदाई
लज़्ज़त का ज़हर वक़्त-ए-सहर छोड़ कर कोई
राही फ़िदाई