Couplets Poetry (page 188)

किसी को साया किसी को गुल-ओ-समर देगा

राही फ़िदाई

हवस-गिरफ़्ता हवाओ निगाहें नीची रखो

राही फ़िदाई

हर एक शाख़ थी लर्ज़ां फ़ज़ा में चीख़-ओ-पुकार

राही फ़िदाई

हादसों के ख़ौफ़ से एहसास की हद में न था

राही फ़िदाई

बराए-नाम ही सही ब-एहतियात कीजिए

राही फ़िदाई

आप ने अच्छा किया ततहीर-ए-ख़्वाहिश ही न की

राही फ़िदाई

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे

राहत इंदौरी

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन

राहत इंदौरी

वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा

राहत इंदौरी

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो

राहत इंदौरी

सूरज सितारे चाँद मिरे सात में रहे

राहत इंदौरी

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम

राहत इंदौरी

शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए

राहत इंदौरी

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है

राहत इंदौरी

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं

राहत इंदौरी

नए किरदार आते जा रहे हैं

राहत इंदौरी

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा

राहत इंदौरी

मिरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे

राहत इंदौरी

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को

राहत इंदौरी

मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया

राहत इंदौरी

मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग

राहत इंदौरी

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता

राहत इंदौरी

मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ

राहत इंदौरी

ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर

राहत इंदौरी

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे

राहत इंदौरी

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया

राहत इंदौरी

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो

राहत इंदौरी

दोस्ती जब किसी से की जाए

राहत इंदौरी

कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए

राहत इंदौरी

बोतलें खोल कर तो पी बरसों

राहत इंदौरी