Couplets Poetry (page 292)
आते हैं जैसे जैसे बिछड़ने के दिन क़रीब
मुनव्वर राना
ज़ुल्फ़-ए-पुर-पेच के सौदे में अजब क्या इम्काँ
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
वो सुबह को इस डर से नहीं बाम पर आता
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
वो हवा-ख़्वाह-ए-चमन हूँ कि चमन में हर सुब्ह
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
वो आइना-तन आईना फिर किस लिए देखे
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
तेज़ रखियो सर-ए-हर-ख़ार को ऐ दश्त-ए-जुनूँ
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
तर्क-ए-शराब भी जो करूँगा तो मोहतसिब
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
सितारे गुम हुए ख़ुर्शीद निकला
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
सताना क़त्ल करना फिर जलाना
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
परवाने के हुज़ूर जलाया न शम्अ' को
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
निकला न दाग़-ए-दिल से हमारा तो कोई काम
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
मर्तबा माशूक़ का आशिक़ से बाला-दस्त है
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
लुत्फ़ तब अमर्द-परस्ती का है बाग़-ए-ख़ुल्द में
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
लैलतुल-क़द्र है हर शब उसे हर रोज़ है ईद
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
क्या ख़बर है हम से महजूरों की उन को रोज़-ए-ईद
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
कूचा-ए-जानाँ मैं यारो कौन सुनता है मिरी
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
ख़त-नवेसी ये है तो मुश्ताक़ो
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
कौन दरिया-ए-मोहब्बत से उतर सकता है पार
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
जी में आता है मय-कशी कीजे
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
इस्लाम का सुबूत है ऐ शैख़ कुफ़्र से
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
हक़्क़-ए-मेहनत उन ग़रीबों का समझते गर अमीर
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
गुलशन-ए-इश्क़ का तमाशा देख
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
फ़रियाद की आती है सदा सीने से हर दम
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
इक बोसा माँगता हूँ मैं ख़ैरात-ए-हुस्न की
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
दुश्मन के काम करने लगा अब तो दोस्त भी
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
बरसों ख़याल-ए-यार रहा कुछ खिचा खिचा
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
बा'द मरने के मिरी क़ब्र पे आया 'ग़ाफ़िल'
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
अपने मजनूँ की ज़रा देख तो बे-परवाई
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
अगर उर्यानी-ए-मजनूँ पे आता रहम लैला को
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
आशिक़ को न ले जाए ख़ुदा ऐसी गली में
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल