Couplets Poetry (page 31)
कारगाह-ए-दुनिया की नेस्ती भी हस्ती है
यगाना चंगेज़ी
का'बा नहीं कि सारी ख़ुदाई को दख़्ल हो
यगाना चंगेज़ी
झाँकने ताकने का वक़्त गया
यगाना चंगेज़ी
जैसे दोज़ख़ की हवा खा के अभी आया हो
यगाना चंगेज़ी
इम्तियाज़-ए-सूरत-ओ-मअ'नी से बेगाना हुआ
यगाना चंगेज़ी
इल्म क्या इल्म की हक़ीक़त क्या
यगाना चंगेज़ी
हुस्न-ए-ज़ाती भी छुपाए से कहीं छुपता है
यगाना चंगेज़ी
हाथ उलझा है गरेबाँ में तो घबराओ न 'यास'
यगाना चंगेज़ी
गुनाह गिन के मैं क्यूँ अपने दिल को छोटा करूँ
यगाना चंगेज़ी
ग़ालिब और मीरज़ा 'यगाना' का
यगाना चंगेज़ी
फ़र्दा को दूर ही से हमारा सलाम है
यगाना चंगेज़ी
दूर से देखने का 'यास' गुनहगार हूँ मैं
यगाना चंगेज़ी
दुनिया से 'यास' जाने को जी चाहता नहीं
यगाना चंगेज़ी
दुनिया के साथ दीन की बेगार अल-अमाँ
यगाना चंगेज़ी
दीवाना-वार दौड़ के कोई लिपट न जाए
यगाना चंगेज़ी
दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है
यगाना चंगेज़ी
दैर ओ हरम भी ढह गए जब दिल नहीं रहा
यगाना चंगेज़ी
बुतों को देख के सब ने ख़ुदा को पहचाना
यगाना चंगेज़ी
बे-धड़क पिछले पहर नाला-ओ-शेवन न करें
यगाना चंगेज़ी
बाज़ आ साहिल पे ग़ोते खाने वाले बाज़ आ
यगाना चंगेज़ी
आ रही है ये सदा कान में वीरानों से
यगाना चंगेज़ी
उठा दी क़ैद-ए-मज़हब दिल से हम ने
वज़ीर अली सबा लखनवी
उल्फ़त-ए-कूचा-ए-जानाँ ने किया ख़ाना-ख़राब
वज़ीर अली सबा लखनवी
तुम्हारी ज़ुल्फ़ न गिर्दाब-ए-नाफ़ तक पहुँची
वज़ीर अली सबा लखनवी
तू अपने पाँव की मेहंदी छुड़ा के दे ऐ महर
वज़ीर अली सबा लखनवी
तिरी तलाश में मह की तरह मैं फिरता हूँ
वज़ीर अली सबा लखनवी
ताइर-ए-अक़्ल को मा'ज़ूर कहा ज़ाहिद ने
वज़ीर अली सबा लखनवी
साक़िया अब के बड़े ज़ोरों पे हैं हम मय-परस्त
वज़ीर अली सबा लखनवी
साकिन-ए-दैर हूँ इक बुत का हूँ बंदा ब-ख़ुदा
वज़ीर अली सबा लखनवी
सज दिया हैरत-ए-उश्शाक़ ने इस बुत का मकाँ
वज़ीर अली सबा लखनवी