Couplets Poetry (page 26)
ये अलग बात कि वो दिल से किसी और का था
ज़फ़र अज्मी
ये अहद क्या है कि सब पर गिराँ गुज़रता है
ज़फ़र अज्मी
सब बड़े ज़ोम से आए थे नए सूरत-गर
ज़फ़र अज्मी
ना-ख़ुदा छोड़ गए बीच भँवर में तो 'ज़फ़र'
ज़फ़र अज्मी
किसी के रास्ते की ख़ाक में पड़े हैं 'ज़फ़र'
ज़फ़र अज्मी
ख़याल-ए-ताज़ा से करते हैं ख़्वाब-ए-नौ तख़्लीक़
ज़फ़र अज्मी
कास-ए-दर्द लिए कब से खड़े सोचते हैं
ज़फ़र अज्मी
इक ख़ौफ़-ए-दुश्मनी जो तआक़ुब में सब के है
ज़फ़र अज्मी
इक ऐसा वक़्त भी सैर-ए-चमन में देखा है
ज़फ़र अज्मी
बजा है ज़िंदगी से हम बहुत रहे नाराज़
ज़फ़र अज्मी
किसी के शोख़ बदन की ज़रूरतों की तरह
ज़फ़र अहमद परवाज़
ज़हर है मेरे रग-ओ-पै में मोहब्बत शायद
यूसुफ़ ज़फ़र
उन की महफ़िल में 'ज़फ़र' लोग मुझे चाहते हैं
यूसुफ़ ज़फ़र
थक के पत्थर की तरह बैठा हूँ रस्ते में 'ज़फ़र'
यूसुफ़ ज़फ़र
साँस लेने को ही जीना नहीं कहते हैं 'ज़फ़र'
यूसुफ़ ज़फ़र
पानी को आग कह के मुकर जाना चाहिए
यूसुफ़ ज़फ़र
है गुलू-गीर बहुत रात की पहनाई भी
यूसुफ़ ज़फ़र
हाए ये तवील ओ सर्द रातें
यूसुफ़ ज़फ़र
एक भी आफ़्ताब बन न सका
यूसुफ़ ज़फ़र
दूर हो कर भी सुनीं तुम ने हिकायात-ए-वफ़ा
यूसुफ़ ज़फ़र
बातों से सिवा होती है कुछ वहशत-ए-दिल और
यूसुफ़ ज़फ़र
आँखों में तिरे जल्वे लिए फिरते हैं हम लोग
यूसुफ़ ज़फ़र
आ मिरे चाँद रात सूनी है
यूसुफ़ ज़फ़र
शब पलंग पर हाँपते साए रहे
यूसुफ़ तक़ी
खाँसती मद्धम सी इक आवाज़ जब से खो गई
यूसुफ़ तक़ी
देखा तो ज़िंदगी में बहुत कामयाब थे
यूसुफ़ तक़ी
बे-सदा क्यूँ गुज़रते हो आवाज़ दो
यूसुफ़ तक़ी
ऐ पड़ोसी तू बता हम को तो कुछ होश नहीं
यूसुफ़ तक़ी
आओ पुरानी याद के शो'लों में ताप लें
यूसुफ़ तक़ी
वक़्त की महरूमियों ने छीन ली मेरी ज़बान
युसूफ़ जमाल