Couplets Poetry (page 160)

मैं तल्ख़ी-ए-हयात से घबरा के पी गया

साग़र सिद्दीक़ी

मैं आदमी हूँ कोई फ़रिश्ता नहीं हुज़ूर

साग़र सिद्दीक़ी

लोग कहते हैं रात बीत चुकी

साग़र सिद्दीक़ी

ख़ाक उड़ती है तेरी गलियों में

साग़र सिद्दीक़ी

काँटे तो ख़ैर काँटे हैं इस का गिला ही क्या

साग़र सिद्दीक़ी

कल जिन्हें छू नहीं सकती थी फ़रिश्तों की नज़र

साग़र सिद्दीक़ी

जो चमन की हयात को डस ले

साग़र सिद्दीक़ी

जिस दौर में लुट जाए ग़रीबों कमाई

साग़र सिद्दीक़ी

जिस अहद में लुट जाए फ़क़ीरों की कमाई

साग़र सिद्दीक़ी

जिन से ज़िंदा हो यक़ीन ओ आगही की आबरू

साग़र सिद्दीक़ी

जिन से अफ़्साना-ए-हस्ती में तसलसुल था कभी

साग़र सिद्दीक़ी

झिलमिलाते हुए अश्कों की लड़ी टूट गई

साग़र सिद्दीक़ी

जब जाम दिया था साक़ी ने जब दौर चला था महफ़िल में

साग़र सिद्दीक़ी

हूरों की तलब और मय ओ साग़र से है नफ़रत

साग़र सिद्दीक़ी

हम बनाएँगे यहाँ 'साग़र' नई तस्वीर-ए-शौक़

साग़र सिद्दीक़ी

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं

साग़र सिद्दीक़ी

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं

साग़र सिद्दीक़ी

एक नग़्मा इक तारा एक ग़ुंचा एक जाम

साग़र सिद्दीक़ी

दुनिया-ए-हादसात है इक दर्दनाक गीत

साग़र सिद्दीक़ी

छलके हुए थे जाम परेशाँ थी ज़ुल्फ़-ए-यार

साग़र सिद्दीक़ी

चराग़-ए-तूर जलाओ बड़ा अंधेरा है

साग़र सिद्दीक़ी

भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार

साग़र सिद्दीक़ी

अब न आएँगे रूठने वाले

साग़र सिद्दीक़ी

अब कहाँ ऐसी तबीअत वाले

साग़र सिद्दीक़ी

अब अपनी हक़ीक़त भी 'साग़र' बे-रब्त कहानी लगती है

साग़र सिद्दीक़ी

आओ इक सज्दा करें आलम-ए-मदहोशी में

साग़र सिद्दीक़ी

आज फिर बुझ गए जल जल के उमीदों के चराग़

साग़र सिद्दीक़ी

यही सहबा यही साग़र यही पैमाना है

साग़र निज़ामी