Couplets Poetry (page 209)
ये ज़मज़मा तुयूर-ए-ख़ुश-आहंग का नहीं
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
ये रूपोशी नहीं है सूरत-ए-मर्दुम-शनासी है
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
ये रिसाला इश्क़ का है अदक़ तिरे ग़ौर करने का है सबक़
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
वुसअ'त-ए-मशरब-ए-रिंदाँ का नहीं है महरम
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
वो माह जल्वा दिखा कर हमें हुआ रू-पोश
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
उश्शाक़ जो तसव्वुर-ए-बर्ज़ख़ के हो गए
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
सिक्का अपना नहीं जमता है तुम्हारे दिल पर
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
सालिक है गरचे सैर-ए-मक़ामात-ए-दिल-फ़रेब
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
क़ालिब को अपने छोड़ के मक़लूब हो गए
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
निगह-ए-नाज़ से इस चुस्त क़बा ने देखा
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
नैरंग-ए-इश्क़ आज तो हो जाए कुछ मदद
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
नहीं खुलता सबब तबस्सुम का
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
नफ़्स-ए-मतलब ही मिरा फ़ौत हुआ जाता है
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
मेरी क़िस्मत की कजी का अक्स है
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
महव-ए-लिक़ा जो हैं मलकूती-ख़िसाल हैं
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
किया है चश्म-ए-मुरव्वत ने आज माइल-ए-मेहर
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जज़्बा-ए-इश्क़ चाहिए सूफ़ी
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जम गए राह में हम नक़्श-ए-क़दम की सूरत
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जान-ओ-दिल था नज़्र तेरी कर चुका
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
हम को भरम ने बहर-ए-तवहहुम बना दिया
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
हुआ न क़ुर्ब-ए-तअ'ल्लुक़ का इख़तिसास यहाँ
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
फ़लक पे चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
दिल भी अब पहलू-तही करने लगा
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
छू ले सबा जो आ के मिरे गुल-बदन के पाँव
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
बुराई भलाई की सूरत हुई
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
अपने जुनूँ-कदे से निकलता ही अब नहीं
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
सुब्ह-दम ग़ाएब हुए 'अंजुम' तो साबित हो गया
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
समझा है हक़ को अपने ही जानिब हर एक शख़्स
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
मअ'नी-ए-रौशन जो हों तो सौ से बेहतर एक शेर
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
मकान सीने का पाता हूँ दम-ब-दम ख़ाली
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी