Couplets Poetry (page 144)
हर लहज़ा उस के पाँव की आहट पे कान रख
सलीम शाहिद
हर बज़्म क्यूँ नुमाइश-ए-ज़ख़्म-ए-हुनर बने
सलीम शाहिद
ज़ोरों पे 'सलीम' अब के है नफ़रत का बहाव
सलीम कौसर
ये लोग इश्क़ में सच्चे नहीं हैं वर्ना हिज्र
सलीम कौसर
ये आग लगने से पहले की बाज़-गश्त है जो
सलीम कौसर
याद का ज़ख़्म भी हम तुझ को नहीं दे सकते
सलीम कौसर
वो जिन के नक़्श-ए-क़दम देखने में आते हैं
सलीम कौसर
वक़्त रुक रुक के जिन्हें देखता रहता है 'सलीम'
सलीम कौसर
तुम ने सच बोलने की जुरअत की
सलीम कौसर
तुम तो कहते थे कि सब क़ैदी रिहाई पा गए
सलीम कौसर
तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं
सलीम कौसर
तू ने देखा नहीं इक शख़्स के जाने से 'सलीम'
सलीम कौसर
तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
सलीम कौसर
साँस लेने से भी भरता नहीं सीने का ख़ला
सलीम कौसर
'सलीम' अब तक किसी को बद-दुआ दी तो नहीं लेकिन
सलीम कौसर
साए गली में जागते रहते हैं रात भर
सलीम कौसर
रात को रात ही इस बार कहा है हम ने
सलीम कौसर
क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं
सलीम कौसर
क़दमों में साए की तरह रौंदे गए हैं हम
सलीम कौसर
पुकारते हैं उन्हें साहिलों के सन्नाटे
सलीम कौसर
मुझे सँभालने में इतनी एहतियात न कर
सलीम कौसर
मोहब्बत अपने लिए जिन को मुंतख़ब कर ले
सलीम कौसर
मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर
सलीम कौसर
मैं ने जो लिख दिया वो ख़ुद है गवाही अपनी
सलीम कौसर
मैं किसी के दस्त-ए-तलब में हूँ तो किसी के हर्फ़-ए-दुआ में हूँ
सलीम कौसर
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और है
सलीम कौसर
मैं जानता हूँ मकीनों की ख़ामुशी का सबब
सलीम कौसर
क्या अजब कार-ए-तहय्युर है सुपुर्द-ए-नार-ए-इश्क़
सलीम कौसर
कुछ इस तरह से वो शामिल हुआ कहानी में
सलीम कौसर
ख़ामोश सही मरकज़ी किरदार तो हम थे
सलीम कौसर