Rubaai Poetry (page 24)
इक तीर कलेजे में पिरोया हम ने
अख़्तर अंसारी
इक शम्अ सर-ए-राह जली ख़ैर हुई
नामी अंसारी
इक ख़्वाब की ताबीर हक़ीक़त ही न हो
बाक़र मेहदी
इक जहल के सैलाब में जो बहते हैं
अमीर चंद बहार
इक बोलती सूरत का नमूना क्या है
सादिक़ैन
इक आतिश-ए-सय्याल से भर दे मुझ को
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
इक आलम-ए-ख़्वाब ख़ल्क़ पर तारी है
इस्माइल मेरठी
एहसास-ए-नशात की कमी देखोगे
नरेश कुमार शाद
एहसास में बे-ताबीे-ए-जाँ रख दी है
अलक़मा शिबली
एहसास को लफ़्ज़ों में पिरोने का फ़न
नावक हमज़ापुरी
एहसास की लज़्ज़त के क़रीब आ जाओ
शौकत परदेसी
एहसास के हर रंग को अपना लेता
हुरमतुल इकराम
एहसान जो अजल से काम तेरा बिगड़े
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
एज़ाज़-ए-सलफ़ के मिटते जाते हैं निशाँ
अकबर इलाहाबादी
दुश्मन को भी दे ख़ुदा न औलाद का दाग़
मीर अनीस
दुनिया-तलबी जाएगी क्या जान के साथ
यगाना चंगेज़ी
दुनिया से सभी बुरे भले जाएँगे
रशीद लखनवी
दुनिया से मेल की ज़रूरत ही नहीं
अकबर इलाहाबादी
दुनिया से अलग जा के कहीं सर फोड़ो
यगाना चंगेज़ी
दुनिया में रह के रास्त-बाज़ी कब तक
यगाना चंगेज़ी
दुनिया में 'क़लक़' क्या है सरासर है ख़ाक
ग़ुलाम मौला क़लक़
दुनिया को न तू क़िबला-ए-हाजात समझ
इस्माइल मेरठी
दुनिया के लिए हैं सब हमारे धंदे
इस्माइल मेरठी
दुनिया के हर एक ज़र्रे से घबराता हूँ
अमजद हैदराबादी
दुनिया कभी हो सकी न हमराज़ मिरी
अकबर हैदराबादी
दुनिया का तमाम कारख़ाना है अबस
ग़ुलाम मौला क़लक़
दुनिया का न खा फ़रेब वीराँ है ये
इस्माइल मेरठी
दुनिया का अजब रंग से देखा अंगेज़
ग़ुलाम मौला क़लक़
दुनिया है इरम से भी हसीं देख ज़रा
नरेश कुमार शाद
दुनिया है अजब बू-क़लमूँ ज़िद-आमोज़
ग़ुलाम मौला क़लक़